Friday, December 19, 2008

सुंदर सेज अनेक सुख रस भोगन पुरे
गृह सोइन चंदन सुगंध लाइ मोंती हीरे
मन इछे सुख मानदा किछु नाही विसुरे
सो प्रभु चित न आवई विस्टा की कीरे
गुरबाणी

यदि स्वर्ण निर्मित घर हो जिसमें हीरे मोटी सजे हों, जहाँ हर समय चंदन की सुगंध आती हो, सुंदर सेज हो सब प्रकार के सुख सुविधा के सामान और रस भोग भी उपलब्ध हों, मनुष्य मनो वांछित सुख भोगता हो किसी प्रकार की कोई कमी न हो, परन्तु उसके चित में यदि परात्मा की याद नहीं तो सब कुछ होते हुए भी उसे गन्दगी की कीडा ही समझो, तात्पर्य यह ही उसका जीवन व्यर्थ ही है

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